नैनीताल हिल स्टेशन (Nainital)

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नैसर्गिक सौंदर्यता को अपने आप में समेटे हुए नैनीताल एक बेहद खूबसूरत जगह है ।  नैनीताल दो भागों में बटा हुआ है दक्षिण की तरफ तल्लीताल और उत्तर की तरफ मल्लीताल । बस और टैक्सी स्टैंड, गवर्नर हाउस और गोल्फ कोर्स तल्लीताल में स्थित है जबकि मल्लीताल में रिक्शा स्टैंड ,हाई कोर्ट ,तिब्बती बाजार ,बड़ा बाजार और केव गार्डन स्थित है।

पुराणों के अनुसार जब प्रजापति दक्ष ने शिव को अपने यहां यज्ञ का निमंत्रण नहीं दिया , तब सती ने अपने पति का अपमान देखकर यज्ञ में कूद अपनी जान दे दी।  इससे क्रोधित होकर शिव सती का पार्थिव शरीर लेकर इधर-उधर घूमने लगे।  शिव की इस दयनीय स्थिति को देख कर, चिंतित होकर सभी देवतागण चिंतित होकर  भगवान विष्णु के पास पहुंचे और कुछ उपाय करने को कहा ,जिसको सुनकर विष्णु भगवान ने अपना सुदर्शन चक्र चलाया जिससे सती के पार्थिव शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े होते चले गए माना जाता है कि यह टुकड़े जहां भी गिरे वहां शक्तिपीठ बनते चले गए और नैनीताल भी इन्हीं शक्तिपीठों में से एक है। देवी सती की बाई आंख नैनीताल में गिरने से यहां की ताल का आकार आंख की तरह है।

नैनीताल के दर्शनीय स्थल:

नैनीझील:

नैनीताल की झील ही इस जगह का मुख्य आकर्षण है। हरे पानी की ये झील चारो तरफ हरे और ऊँचे पहाड़ो से घिरी हुई है।  इस पर चलती हुई पाल नौकाए इस खूबसूरत जगह म चार चाड लगा देती है।  बिना नौकायान के नैनीताल की यात्रा अधूरी है। नैनीझील को त्री”- ऋषि  सरोवर” के नाम से भी जाना जाता है।

बोट हाउस क्लब:

नैनी झील की उत्तरी छोर पर स्थित  उनीस्वी  शताब्दी के मध्य मे बने बोट हाउस क्लब पर्यटको के लिए एक अच्छा स्थल है।  यहा की मधुशाला में लकड़ी से निर्मित फर्श  और झील की तरफ लगे हुए फर्नीचर पर बैठ कर झील को निहारना  एक अलग ही एहसास  देता है।

नैनीताल जू  (चिड़ियाघर) :

भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जू  (चिड़ियाघर) नवनिर्मित उत्तराखंड राज्य का एकमात्र उच्च ऊंचाई वाला चिड़ियाघर है जिसकी स्थापना 1984 में की गई थी जिसका क्षेत्रफल 4.693 हेक्टेयर है। आम लोगों के लिए चिड़ियाघर 1 जून1995  को खोला गया, “भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत हाई एल्टीट्यूड जू मैनेजमेंट सोसाइटी ऑफ नैनीताल” को मार्च 2002 से इसके प्रबंध की जिम्मेदारी सौंपी गई। चिड़ियाघर में कई प्रकार के दुर्लभ वन्य जीव जिसमें स्नो लेपर्ड, हिमालयन काला भालू, हिमालयन भेड़िया और कई प्रकार की दुर्लभ चिड़ियाएं शामिल है।

केव गार्डन :

हाल ही मैं बना केव गार्डन एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है। इस केव गार्डन में विभिन्न जानवरों की कई प्राकृतिक गुफाएं है जो एक दूसरे से जुड़ी हुई है। यह गुफा पर्यटक और खासकर बच्चों के लिए उच्च हिमालय क्षेत्र के जीव-जंतुओं और उनके प्राकृतिक निवास की छवि पाने के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान करती है। यह गुफा नैनीताल के उत्तर में स्थित है जिसमें आसानी से पहुंचा जा सकता है।

स्नो व्यू :

केव गार्डन से स्नो व्यू 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहां रोपवे के द्वारा भी पहुंचा जा सकता है। स्नो व्यू टॉप से आप हिमालय के विहंगम दृश्य का दर्शन कर सकते हैं, जो आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। जिसमें त्रिशूल, नंदा देवी, नंदा कोट आदि हिमालय चोटियां शामिल है। पर्यटकों के लिए यहां केएमवीएन गेस्ट हाउस भी उपलब्ध है।

चाइना पीक :

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चीन पीक को नैना पीक भी खा जाता है, जो नैनीझील के उत्तर की ओर स्थित यहाँ की सबसे ऊँची चोटी है। मल्लीताल से चीन पीक लगभग 6 कि.मि. की दुरी पर स्थित है और यहाँ ट्रेक करके अथवा घोड़ो के द्वारा पहूँचा जा सकता है।  नैना पीक ट्रेक मार्ग खूबसूरती से भरा हुआ है , रस्ते म बुरांश, देवदार आदि के ऊँचे ऊँचे पेड़ो  से भरा हुआ है ये छेत्र जीव जंतु बहुल छेत्र है।  ऊपर पाउच कर उत्तर की तरफ  उत्तराखंड  और नेपाल हिमालय मनोरम दृश्य के दर्शन होते है वही इसके विपरीत दिशा मे  आप नैनीताल के हवाई दर्शन के साथ साथ तराई के इलाको के दर्शन भी होते है।

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गर्नी हाउस :

गर्नी  हाउस जिम कॉर्बेट का निवास स्थान था जो की एक महान पर्यावरण संरक्षक और शिकारी थे। इस घर म अभी भी जिम कॉर्बेट के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण चीज़े राखी हुई है जिसमे ट्रोफ़ियां, आफ़्रिकन ड्रम, बोट, फिशिंग रॉड, किताबें और फर्नीचर शामिल है।

अरबिंदो आश्रम :

अरबिंदो आश्रम  मल्लीताल से लगभग दो (2) की. मि. की दुरी पर, किलबरी मार्ग पर स्थित है। ये स्थल शांति से भरा हुआ है जो की योग और ध्यान के लिए एक उपयुक्त स्थल है।  यह रहने कि भी उपयुत  व्यस्था है , जिसके लिए पहले से ही बुकिंग करा सकते है।

नैनीताल कैसे पहुँचे ?

सड़क मार्ग: दिल्ली से नैनीताल की दुरी लगभग 312 की.मि. है। यह आसानी से पाउच जा सकता है।

हवाईजहाज से: पंतनगर सबसे नजदीकी हवाईअड्डा है जो की 58 की. मि. की दुरी पर है.

रेलमार्ग : काठगोदाम नजदीकी रेलवे स्टेशन है जो की 23 की. मि. की दुरी पर है। यहाँ से आसानी से हरवक्त नैनीताल के लिए यातायात के साधन उपलब्ध है।

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