भीमताल

तराई से कुछ किलोमीटरों की दुरी में स्थित भीमताल एक अत्यंत शांत वादियो में बसा हुआ एक छोटा सा नगर है, जो की एक मनमोहक झील के आस-पास बसा हुआ है। भीमताल झील को ही उत्तराखंड की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील होने का गौरव प्राप्त है। चारो और से हरी भरी चाक्करदार पहाड़ियों की बीच घिरे इस झील  की छठा देखते ही बनती है।

ये शहर समुद्रतल से 1,371 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। ये नगर तीन हिस्सो मई बटा हुआ है , जिसमें दक्षिण की तरफ तल्लीताल , उत्तर की तरफ मल्लीताल और बीच में डॉट जहाँ डैम से तर्राई के लिए पानी की निकासी भी होती है। डैम के ऊपर लगभग २ मीटर चौड़ा मार्ग भी है जो की दो पहिया वाहन और पैदल यात्रियों के लिए आम रास्ता है।  डैम से लगा हुआ  भीमेश्वर महादेव का मंदिर भी है, माना जाता है की ये शिव मंदिर की स्थापना 17वी शताब्दी में राजा बाज बहादुर चंद के द्वारा की गई थी। इस मंदिर में कुछ पुरानी मूर्तियां भी है जिनको शिलाओं को तराशकर बनाया गया है।

पुराणों के अनुसार महाभारत के भीम के ही द्वारा इस तालाब की उत्त्पत्ति हुई है जिस कारण इसका नाम भीमताल पड़ा।  यह भी माना जाता है की पांडवो के द्वारा ही झील के किनारे शिवलिंग की स्थापना की गई, जिसे भीमेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

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भीमताल के दर्शनीय स्थल:

भीमताल लेक:

भीमताल की ताल लगभग 2 की.मि. लंबी और 500 मीटर चौड़ी है। ताल के हरे रंग के पानी में तैरती हुई महाशीर प्रजाति की मछलिया  आसानी से देखी जा सकती है। मत्स्याखेट (मछली के शिकार) के शौकीनों के लिए भी ये जगह एक अच्छा अवसर प्रदान करती है, यहां का मत्स्य विभाग मत्स्याखेट के लिए लाइसेंस जारी करता है।

एक्वेरियम (मछलीघर):

ताल के बीचो बीच एक टापू उभरा हुआ है जिसमें कुछ साल पहले रेस्तरां हुआ करता था मगर अब इसमें मछलीघर की स्थापना की गई है।  इस मछलीघर में देश विदेश जैसे चीन, लैटिन अमेरिका, साउथ अफ्रीका आदि जगहों से रंग बिरंगी मछलिया लायी गई है । यहाँ  केवल नौका के द्वारा पहुँचा जा सकता है , और इसमें प्रवेश के लिए वयस्कों को ६० (60) रु. और बच्चो के लिए ३० (30) रु. किराया लगता है।

करकोटक:

भीमताल की सबसे ऊँची चोटी होने का गौरव करकोटक को प्राप्त है। डॉट से लगभग 5 की. मि. की पैदल चढ़ाई करके इस जगह पहुँचा जा सकता है। इस चोटी पर नाग देवता “करकोटक” का एक पुराना मंदिर भी है , इसलिए इस चोटि का नाम भी करकोटक पड़ा। करकोटक की चोटी से तराई और पहाड़ियों का नजारा देखते ही बनता है।  इस चोटी से आप भीमताल के विहंग्मय दृश्य के साथ साथ नौकुचियाताल और नैनीताल की पहाड़ियों के दर्शन भी कर सकते है।

बटरफ्लाई म्यूजियम ( तितली संग्रहालय):

लगभग 2,500 प्रजाति  की तितलियाँ, कीट-पतंगों के नमूने  मिस्टर पीटर  इस भव्य संग्रालय म पाई जाती  है।  इसकी संग्रहालय की नींव सर फ्रेडरिक स्मेटसेक द्वारा की गई थी। भीमताल से लगभग २ की. मि. दूर जोंस एस्टेट में ये म्यूजियम स्थित है। आजकल इस संग्रालय की देख रेख मिस्टर पीटर के द्वारा की जाती है , जो इन प्रजीतियों की बारे म अच्छी जानकारी रखते है।

भीमेश्वर महादेव मंदिर:

ये मंदिर विक्टोरियन डैम के ठीक बगल में स्थित है , जोकि   भगवान् शिव को समर्पित है।  ये मंदिर कई संतो के लिए आश्रय भी प्रदान करता है। मंदिर का वातावरण यहाँ आने वाले भक्तो को अत्यंत शीतलता प्रदानकर्ता है।

भीमताल के आस पास:

घोड़ाखाल:

भीमताल से लगभग 12 की. मि. दूर घोड़ाखाल सैनिक स्कूल और कुमाऊं के जज कहे जाने वाले गोलू देवता के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। गोलू देवता को इन्साफ का देवता मना जाता है , इसीलिए इन्साफ की आस में लोग इस मंदिर में स्टाम्प पेपर में अपनी शिकायत , दुःख और दर्द लिख कर छोड़ जाते है।

नैनीताल:

उत्तराखंड की अत्यंत मनमोहक तालों में से एक नैनीताल, भीमताल से  मात्र 18 की. मि. की दुरी में स्थित है।  जिला मुख्यलय होने के साथ साथ , नैनीताल को ही ” लेक डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ इंडिया ” के नाम से भी जाना जाता है।

नौकुचियाताल:

भीमताल से 5 की. मि. की दुरी मई स्थित ये 9 कोनों वाला ताल एक अत्यंत शांत वादियों में बसा है। इस ताल से लगता हुआ एक ताल भी है, जो  की कमल के फूलों के लिए प्रसिद्ध है , और इसीलिए इसे ‘कमलताल’ के  नाम से जाना जाता है। नौकायन के साथ साथ नाउचियाताल पैराग्लाइडिंग और घुड़सवारी के लेया भी एक आदर्श स्थान है।

सातताल:

अत्यंत शांत वादियों मई बसा सातताल भीमताल से लगभग १० की. मि. की दुरी पर स्थित है।  सातताल का नाम इसकी सात आपस मई जुडी हुई तालों के आधार पर रखा गया है जो हैं – राम ताल, लक्ष्मण ताल, सीता ताल, भरत ताल, हनुमान ताल, नलदमयंती ताल और गुराड ताल। ये जगह  साहसिक खेलो और अपनी शांत वादियों में विभिन्न तरह के पक्षियों के लिए जनि जाती है।

मुक्तेश्वर:

समुद्रतल से  2,286 मीटर की ऊंचाई पर बसा एक छोटा मगर बेहद खूबसूरती को समेटे हुए मुक्तेश्वर भीमताल से लगभग 37 की. मि. की दुरी पर स्थित है।  मुक्तेश्वर टॉप से आप कुमाऊं और गड़वाल के पवित्र हिमालय के दर्शन कर सकते है। इस जगह से  नंदा देवी , नंदा  घुंटी, नंदाकोट, त्रिशूल, और पंचाचूली की गगनचुम्बी चोटियों के दर्शन होते है।

भीमताल कैसे पहुँचे ?

सड़क मार्ग:

दिल्ली से भीमताल  की दुरी लगभग 317 की.मि. है। यह आसानी से पाउच जा सकता है।

हवाईजहाज से:

पंतनगर सबसे नजदीकी हवाईअड्डा है जो की 54 की. मि. की दुरी पर है.

रेलमार्ग:

काठगोदाम नजदीकी रेलवे स्टेशन है जो की 18 की. मि. की दुरी पर है। यहाँ से आसानी से हरवक्त नैनीताल के लिए यातायात के साधन उपलब्ध है।

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